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Holi: होली क्यों मानते हैं ?

होली एक हिंदू उत्सव है जो हर साल फाल्गुन महीने के पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह उत्सव रंगों के साथ मनाया जाता है जो लोगों को जीवन के रंगों की खुशी का पाठ पढ़ाते हैं। होली के अनुसार, यह उत्सव प्रकृति का उत्सव है जो सूर्य और पृथ्वी के रिश्ते को जश्न मनाता है। इसके अलावा, होली के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी मनाया जाता है। Holi

होली के दौरान, लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं और मिठाई खाते हैं। इसके अलावा, वे दिन की शुरुआत पूजा और हवन के साथ करते हैं। होली के महत्वपूर्ण उपलक्ष्यों में से एक उत्सव में दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना है और जीवन के साथ हंसमुख रहना है। इसके अलावा, यह एकता, समझौता और समरसता का संदेश देता है जो हमारे समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। Holi

क्या आपको पता है होली क्यों मानते हैं ?
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बिहार में होली कैसे मानते हैं

बिहार में होली को फाल्गुन पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है और इसे “फागुआ” या “फगुआ” के नाम से भी जाना जाता है। यह उत्सव बिहार के लोगों के लिए एक बड़ा महत्व रखता है और इसे खुशी, मज़ा और मिठास का उत्सव माना जाता है। Holi

बिहार में होली के दौरान लोग एक दूसरे को अभिनंदन देते हैं और एक दूसरे के साथ रंगों की खुशी मनाते हैं। इसके अलावा, लोग दोस्तों और परिवार के साथ मिठाई और नमकीन खाते हैं और एक दूसरे के साथ खुशी के पल बाँटते हैं। बिहार में होली के दौरान, लोग अपने घरों को सजाते हैं और उन्हें खूबसूरत रंगों से सजाते हैं। बिहार के कुछ इलाकों में, लोग भांग पीते हैं जो भागवत कथा गाने के समय पी ली जाती है। Holi

बिहार में होली के दौरान खुशी और उत्साह से भरी होती है और लोग दिन को खुशी और मस्ती से बिताते हैं। इस उत्सव के दौरान, सभी एक दूसरे के साथ खुशी का संदेश देते हैं | Holi

होली मनाने के पारंपरिक तारिके क्या है

होली को भारत के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक तरीकों से मनाया जाता है जो निम्नलिखित हैं:

  1. होली का पूजन: होली का पूजन परंपरागत रूप से किया जाता है। लोग अपने घरों में पूजा रखते हैं जिसमें होली के देवता भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
  2. रंगों का उछाल: होली के दिन रंगों का उछाल किया जाता है। लोग एक दूसरे के ऊपर रंग फेंकते हैं और रंगों के साथ खुशी और मस्ती मनाते हैं।
  3. धुलेंगा: होली के दिन धुलेंगा खेला जाता है जो भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में विशेष रूप से प्रचलित है। इसमें लोग पानी और रंगों के साथ खेलते हैं और एक दूसरे को पानी फेंकते हैं।
  4. गुजिया: होली के दिन गुजिया बनाई जाती है जो एक मिठाई होती है जिसमें खीर, नारियल और शक्कर डाली जाती है। यह मिठाई बिना होली के उत्सव के पूरा नहीं माना जाता है।
होली हमें विभिन्न सीख देती है जो हमारे जीवन में महत्वपूर्ण होती है।
  1. समानता: होली के दिन सभी लोग रंगों में लिपटे होते हैं जिससे वे एक समान दिखते हैं। इस उत्सव से हमें समानता का संदेश मिलता है जिसे हम सभी अपने जीवन में लागू कर सकते हैं।
  2. अनुशासन: होली के दिन लोग एक दूसरे के ऊपर रंग फेंकते हैं लेकिन वे इसे अपने सामने या उनके जिस्मानी अंगों पर नहीं फेंकते हैं। इससे हमें अनुशासन का संदेश मिलता है।
  3. माफी: होली के दिन लोग एक दूसरे के साथ रंग फेंकते हैं जिससे कई बार कोई गलती हो जाती है। इस उत्सव से हमें माफी मांगने और दूसरों को माफ करने की सीख मिलती है।
  4. सम्बंध बनाना: होली के दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताते हैं जो हमें सम्बंध बनाने की सीख देता है।
  5. खुशी का महत्व: होली खुशी के उत्सव का एक अच्छा उदाहरण है जो हमें यह सिखाता है कि जीवन में खुशी का महत्व क्या है। Holi
होली के दिन कौन कौन सा पकवान बनाया जाता है !!

होली के दिन विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें से कुछ पारंपरिक हैं और कुछ नए विकसित हुए हैं। नीचे होली के दिन बनाए जाने वाले कुछ पकवानों की सूची दी गई है:

  1. गुजिया: गुजिया होली का सबसे प्रसिद्ध पकवान है। इसमें मैदा से बनी आवेश्यक बना दिया जाता है जो नारियल, खोया और शक्कर से भरा जाता है। गुजिया तले जाते हैं और उन्हें शीरा में डुबोया जाता है।
  2. दही भल्ला: दही भल्ला होली के दिन खास तौर पर बनाया जाता है। इसमें मैदा और उरद दाल का आटा मिलाकर बेल बनाया जाता है जिसे फ्राइ कर दही के साथ परोसा जाता है। इसमें खट्टे मीठे चटनी और मसाले का नमकीन फूल भी डाला जाता है।
  3. मठरी: मठरी भी होली का पौराणिक पकवान है। इसमें मैदा और सूजी का आटा मिलाकर मठरी बनायी जाती है जो तेल में तलकर खायी जाती है।
  4. थंडई: होली के दिन थंडई भी पी जाती है जो एक प्रकार का ठंडा मिश्रण होता है
होलिका दहन क्यों मानते हैं

होलिका दहन एक पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। इस कथा के अनुसार, देवताओं और राक्षसों के बीच असंतोष था जिसे दूर करने के लिए वे भगवान विष्णु के पास गए।

वहां, वे उनसे पूछते हैं कि दुष्ट राजकुमार हिरण्यकश्यप अपनी बहन होलिका की सहायता से अपने पुत्र प्रह्लाद को मारना चाहता है। होलिका अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके उसे जलाकर मारने की कोशिश करती है, लेकिन उसकी योजना असफल हो जाती है और होलिका खुद जलकर मर जाती है।

इस घटना के बाद, होली के पूर्व दिन लोग होलिका का दहन करते हैं जो दुष्टता और असंतोष को नष्ट करने के लिए होता है। यह उत्सव भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा के साथ मनाया जाता है।

इस प्रकार, होलिका दहन हमें असंतोष को नष्ट करने के लिए विश्वास दिलाता है और हमें यह भी बताता है कि जब भी दुष्टता और असंतोष नष्ट होता है तो शुभता और खुशी हमेशा अधिक होती है। Holi

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