नई दिल्ली:
साइबर सुरक्षा को लेकर एक नया और गंभीर खतरा सामने आया है। साइबर एक्सपर्ट रितेश कुमार ने व्हाट्सऐप यूजर्स को एक नए साइबर फ्रॉड “घोस्ट पेयरिंग स्कैम” के बारे में चेतावनी दी है। इस स्कैम की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें न तो OTP की जरूरत होती है, न पासवर्ड की और न ही सिम कार्ड क्लोनिंग की जाती है, फिर भी यूजर का अकाउंट हैक हो सकता है।
क्या है ‘घोस्ट पेयरिंग स्कैम’?
रितेश कुमार के अनुसार, यह स्कैम पारंपरिक हैकिंग तरीकों से अलग है और पूरी तरह सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित है। इसमें यूजर को किसी परिचित व्यक्ति या भरोसेमंद पहचान के नाम से एक मैसेज भेजा जाता है। मैसेज में किसी जरूरी अपडेट, वेरिफिकेशन या तकनीकी समस्या का हवाला देकर एक लिंक दिया जाता है।
जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है, वह एक नकली फेसबुक या व्हाट्सऐप जैसे दिखने वाले पेज पर पहुंच जाता है। वहां उससे उसका मोबाइल नंबर डालने और फिर एक पेयरिंग कोड दर्ज करने को कहा जाता है।
कैसे होता है व्हाट्सऐप हैक?
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक, यूजर जैसे ही वह पेयरिंग कोड दर्ज करता है, वह अनजाने में अपने व्हाट्सऐप अकाउंट को हैकर के डिवाइस से जोड़ देता है। इसके बाद हैकर का डिवाइस Linked Device की तरह एक्टिव हो जाता है।
इस स्थिति में हैकर को:
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यूजर की चैट्स
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फोटो और वीडियो
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डॉक्यूमेंट्स
का एक्सेस मिल सकता है।
इतना ही नहीं, हैकर यूजर की पहचान का इस्तेमाल कर दूसरों को मैसेज भेज सकता है और नए स्कैम फैला सकता है।
सबसे खतरनाक पहलू क्या है?
इस स्कैम की सबसे बड़ी और डरावनी बात यह है कि पीड़ित यूजर के फोन पर कोई सिक्योरिटी अलर्ट या चेतावनी नहीं आती। कई मामलों में यूजर को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उसका व्हाट्सऐप अकाउंट किसी दूसरे डिवाइस से जुड़ा हुआ है।

यूजर्स के लिए क्या है बचाव का तरीका?
रितेश कुमार ने व्हाट्सऐप यूजर्स को कुछ अहम सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
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किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह किसी परिचित के नाम से ही क्यों न आया हो
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नियमित रूप से WhatsApp के Settings > Linked Devices सेक्शन को चेक करें
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अगर कोई अनजान डिवाइस दिखे, तो तुरंत उसे लॉगआउट करें
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किसी को भी पेयरिंग कोड, QR कोड या वेरिफिकेशन से जुड़ी जानकारी साझा न करें
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता और जागरूकता इस तरह के खतरनाक साइबर फ्रॉड से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते खतरे को देखते हुए यूजर्स को किसी भी मैसेज या लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी हो गया है।
